सहारनपुर : बाघेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के नए ब्यान ने सबको चौंका दिया है। धीरेन्द्र शास्त्री ने जहां कहा कि हिंदुओं को एक बात पर ध्यान देना चाहिए। मुसलमानों को गाली देने से भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हिंदुओं को अपनी गलतियों को सुधारना होगा तभी भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। धीरेन्द्र शास्त्री के इस ब्यान के बाद देवबंदी उलेमाओं में भी खलबली मची हुई है। देवबंदी उलेमाओं ने धीरेन्द्र शास्त्री का जहां स्वागत किया है वहीं हिन्दुओं को भड़काने का आरोप भी लगाया है। कारी इश्हाक गोरा ने कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री एक कथा वाचक हैं जो हमेशा भड़काऊ भाषण देते रहते हैं। कथाएं कम करते हैं। उनके ब्यान को उलेमाओं ने सियासी ब्यान करार दिया है।

कारी इश्हाक गोरा ने धीरेन्द्र शास्त्री के ब्यान पर पलटवार करते हुए कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री कभी कहते हैं देश हिन्दू राष्ट्र कब बनेगा ? हिन्दू एक हो जाओ, नहीं तो बांग्लादेश जैसी स्तिथि हो जायेगी। एक डर का माहौल करने की कोशिश करते हैं। धीरेन्द्र शास्त्री खुद इस तरह की बातें करते हैं और अब आकर ये कह रहें कि मुसलमानों को डराने से देश हिन्दू राष्ट्र नहीं बनेगा। अपनी ये बातें वे हिन्दुओं पर थोप रहे हैं। उनको अपने ऊपर खुद ध्यान देने की जरूरत है। पता नहीं उनको हिन्दुओं में क्या गलती नजर आती है? मुझे तो लगता है उल्टी-सीधी बातें करके सबसे ज्यादा वे खुद गलती करते हैं। एकता की बात ना करके समाज को तोड़ने वाली बात करते हैं। वे हमेशा एक समुदाय विशेष को जोड़ने की बात करते हैं। ये कोई समझदारी नहीं बल्कि नियायत बेकवूफी वाली बाते हैं। धीरेन्द्र शास्त्री अब कथावाचक नहीं रहे क्योंकि अब वे सियासत से जुटी बातें करते हैं। कभी हिन्दुओं को डराने वाली बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में उनका एक ब्यान आया जिसमें वे कह रहे हैं कि अगर आप अपने बच्चों को वेद नहीं पढ़ाएंगे तो आपके घर में कोई नावेद हो, कोई जावेद होगा ? इत्तफाक देखिये मेरे पास एक ऐसे नावेद और जावेद भी जो वेद जानते हैं।
इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना साजिद रशीदी ने तीखी प्रक्रिया देते हुए कहा कि पंडित धीरेन्द्र शास्त्री जो ब्यान सामने आया है। ब्यान में कही उनकी ये बातें अच्छी हैं स्वागत योग्य हैं। लेकिन आग लगाकर पुरे देश में हिन्दुओं को भड़का कर अब जो कह रहे हैं कि हिन्दुओं को चाहिए अपनी गलतियां सुधारें। आप तो खुद मंचों से मुसलामानों को गालियां दिलवा रहे थे और खुद दे रहे थे। उस वक्त आपको अहसास नहीं हुआ उस वक्त भी आपको सोचना चाहिए था। आप धर्मगुरु हैं और कथावाचक हैं। आप वेदों को पढ़ रहे हैं आप धार्मिक किताबों को पढ़ते हैं। आपको इतना ज्ञान तो होना चाहिए। धार्मिक किताबों को कहीं नहीं लिखा कि दूसरे धर्म को गाली दो उसको बुरा भला कहो, उसको मलेछ कहो अधर्मी कहो। जब आप ठाकुर के साथ मिलकर धर्म संसद में मुसलमानों को मलेछ अधर्मी, इनके साथ कारोबार ना करो, उन्हें दूकान-मकान किराए पर ना दो। इस तरह की बातें कर रहे थे तब भी सोचना चाहिए था। खैर देर आये दुरुस्त आये अब भी आपके दिमाग में ये बात आ गयी तो अच्छी है। लेकिन आप इस बात पर जमे रहना। क्योंकि आपका कुछ पता नहीं है कब पलटी खा जाओ। अगर जमे रहोगे तो फायदे में रहोगे।
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